इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (2 अप्रैल) को एलान किया कि ईरान में अपने लक्ष्य पूरे करने के बाद ही उनकी सेना इस युद्ध से बाहर निकलेगी। उन्होंने कहा कि इस काम में दो से तीन हफ्ते का समय लग सकता है। इस बीच अपनी ऊर्जा सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर खाड़ी देश, जैसे- संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, आदि इसके आगे भी बंद रहने की संभावना को देखते हुए तेल-गैस पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। जिन योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, उनमें से एक योजना खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बनाई गई थी। हालांकि, इस पर लंबे समय से काम अटका है।
आइये जानते हैं कि खाड़ी देश अब होर्मुज से आगे व्यवस्था पर विचार क्यों कर रहे हैं? जिन वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है, वह क्या हैं? योजनाओं में भारत की क्या भूमिका रही है? अगर योजना जमीन पर उतरती है तो इससे भारत को क्या फायदा होगा? आइये जानते हैं…

