फ्रांस में हाईस्कूल छात्रों के आंदोलन ने राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू और वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेनशों के बीच सोमवार को छात्रों के स्कूलों में तालाबंदी और प्रदर्शन को लेकर तीखी बयानबाजी हुई। छात्र स्कूलों में अधिक संसाधन, शिक्षकों की कमी दूर करने और पढ़ाई से जुड़ी परेशानियों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह विरोध दूसरे इलाकों तक भी पहुंच गया है और अब इसका असर देश की राजनीति पर साफ दिखाई दे रहा है।
इस विवाद ने ऐसे समय राजनीतिक रंग पकड़ा है, जब फ्रांस अगले वसंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहा है और सरकार 2027 का बजट पास कराने के लिए संसद में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। छात्रों की शिकायतों में स्कूलों की खराब होती स्थिति, शिक्षकों की कमी और भारी कक्षा कार्यक्रम शामिल हैं। दूसरी ओर, सरकार के सामने बढ़ती ऊर्जा कीमतों और दूसरे खर्चों के बीच बजट में कटौती का दबाव है। ऐसे माहौल में अलग-अलग राजनीतिक दल युवाओं और दूसरे मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना रहे हैं।
छात्रों के आंदोलन को लेकर लेकोर्नू और मेलेनशों में विवाद क्यों हुआ?
प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने आरोप लगाया कि मेलेनशों की पार्टी ‘फ्रांस अनबो’ के कुछ नेता हाईस्कूलों में चल रहे विरोध को और फैलाने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका कहना था कि स्कूलों के आसपास मोर्टार फायरिंग, आगजनी और हिंसा जैसी घटनाओं में छात्रों, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा खतरे में नहीं डाली जानी चाहिए। इसके जवाब में मेलेनशों ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आरोप लगाया और कहा कि युवाओं को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों से आंदोलन के दौरान सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील भी की।
प्रदर्शन के दौरान कहां हुई हिंसा और कितने छात्र गिरफ्तार हुए?
छात्रों का विरोध पिछले सप्ताह पेरिस क्षेत्र के कुछ स्कूलों से शुरू हुआ था और बाद में दूसरे क्षेत्रों तक फैल गया। दक्षिणी एल्प्स-मैरिटाइम्स क्षेत्र में सोमवार को पुलिस ने 10 हाईस्कूल छात्रों को गिरफ्तार किया। उन पर आग लगाने, वस्तुएं फेंकने और ऐसी हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं, जिनमें दो छात्र घायल हुए। आंदोलन के दौरान कई जगह स्कूलों को बंद कराने की कोशिश और पुलिस की मौजूदगी बढ़ने की घटनाएं सामने आईं। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पेरिस क्षेत्र के कई स्कूलों में भी प्रदर्शन और झड़पों के कारण तनाव बना हुआ है।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले छात्र आंदोलन इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है?
छात्रों की शिक्षा संबंधी मांग अब केवल स्कूलों तक सीमित मुद्दा नहीं रह गई है। राष्ट्रपति चुनाव अगले वसंत में होना है और युवा मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों की दिलचस्पी बढ़ी हुई है। मेलेनशों पहले भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुके हैं और 2022 में तीसरे स्थान पर रहे थे। वह आगामी चुनाव में पहले दौर से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव का बढ़ना चुनावी माहौल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं लेकोर्नू की सरकार के सामने विभाजित संसद में 2027 का बजट पारित कराने की चुनौती भी बनी हुई है।
लेकोर्नू ने मेलेनशों के आरोपों पर क्या जवाब दिया?
मेलेनशों ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई में कठोरता और नस्लीय रंग होने का आरोप लगाया। लेकोर्नू ने इस आरोप को अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों को सुरक्षा का अधिकार है, स्कूल कर्मचारियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए और पुलिस अधिकारियों के काम का भी सम्मान होना चाहिए। लेकोर्नू ने कहा कि हिंसा की निंदा करना और छात्रों पर हमला करने वालों के खिलाफ बोलना जरूरी है। इस बयानबाजी के साथ छात्र आंदोलन फ्रांस में शिक्षा और संसाधनों के सवाल से आगे बढ़कर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक संघर्ष का मुद्दा बन गया है।


