पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की बातचीत (US Iran Peace Talks in Pakistan) फेल होने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या जंग फिर शुरू होने वाली है. 21 घंटे तक चली शांति वार्ता फेल होने के बाद मिडिल ईस्ट में फिर से तनाव का खतरा बढ़ गया है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. अमेरिका ने फाइनल और बेस्ट ऑफर दिया है और अब फैसला ईरान को करना है. जेडी वेंस के बयान के बाद यह साफ हो गया कि दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी गहरे हैं. खासकर परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दों पर.
ट्रंप पहले ही जीतने का दावा कर चुके हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी काफी सख्त है. उन्होंने कहा कि चाहे डील हो या न हो, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता. हम पहले ही जीत चुके हैं. ट्रंप के इस बयान ने यह संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल दबाव की रणनीति जारी रखना चाहता है, बजाय इसके कि वह किसी समझौते के लिए झुके. ऐसे में अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ती तो दो हफ्ते का सीज़फायर भी टूट सकता है. ऐसा हुआ तो फिर नए सिरे से जंग शुरू हो जाएगी.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है. हम अभी भी लड़ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अभी भी इनरिच यूरेनियम मौजूद है, जिसे खत्म करना जरूरी है.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बना है गतिरोध
होर्मुज स्ट्रेट इस शांति वार्ता का सबसे हॉट टॉपिक बना हुआ है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक इस रास्ते को पूरी तरह खोलने का सवाल ही नहीं उठता. ऐसे में अगर यह बंद रहता है तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित रहेगी और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा.
माइन्स हटाने का काम कर रहा अमेरिका
बातचीत के दौरान यह भी खबरें सामने आई कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा बिछाए गए माइन्स को हटाने का काम कर रहा है. इसके लिए बताया जा रहा है कि 2 डिस्ट्रॉयर को तैनात किया गया है. दावा है कि इन दोनों ने होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है. हालांकि ईरान की तरफ से कहा गया कि चेतावनी के बाद अमेरिकी डिस्ट्रॉयर लौट गए हैं.
एक तरफ अमेरिका फाइनल ऑफर की बात कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ ईरान अपने अधिकारों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. ऐसे में या तो ईरान अमेरिकी प्रस्ताव मान ले, या फिर दोनों देश नए सिरे से बातचीत शुरू करें लेकिन अगर दोनों में कुछ नहीं हुआ तो जंग फिर से शुरू हो सकती है. इस पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.
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