पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और अस्थिर हालात के बीच अब रूस ने कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रियता बढ़ा दी है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान से फोन पर बात की है। बातचीत में पुतिन ने संकेत दिया है कि रूस पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। इससे पहले शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। ईरान और अमेरिका का प्रतिनिधमंडल पाकिस्तान भी पहुंचा था। हालांकि वहां बात नहीं बन पाई।
वहीं, पुतिन ने इस बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा संघर्ष को रोकने के लिए तुरंत हिंसा बंद करना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि सैन्य कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा और केवल राजनीतिक व कूटनीतिक रास्ता ही स्थायी शांति दिला सकता है। क्रेमलिन के अनुसार रूस सभी पक्षों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है और स्थिति को शांत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
क्या रूस खुद को मुख्य मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है?
रूस की यह पहल केवल एक बयान नहीं बल्कि रणनीतिक कदम भी मानी जा रही है। पुतिन पहले भी कई देशों और खाड़ी क्षेत्र के नेताओं के संपर्क में रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि रूस खुद को इस संकट में एक अहम कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
ये भी पढ़ें- US-Iran: ट्रंप ने शांति वार्ता विफल होने पर ईरान को बताया जिम्मेदार, होर्मुज की सैन्य नाकेबंदी का किया एलान
क्या बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है?
पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा ने पूरे विश्व को चिंतित कर दिया है। इस्राइल और क्षेत्र के अन्य हिस्सों में जारी हमलों ने हालात को और जटिल बना दिया है। इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यही कारण है कि बड़ी ताकतें अब इस संकट को जल्द सुलझाने के लिए सक्रिय हो रही हैं।
क्या कूटनीति ही अब आखिरी रास्ता बचा है?
रूस ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। पुतिन ने कहा कि सभी पक्षों को संयम दिखाना होगा और बातचीत के जरिए ही स्थायी शांति हासिल की जा सकती है। रूस की यह पहल ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में भी अनिश्चितता बनी हुई है।
अन्य वीडियो-


