भारत ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र में क्रिटिकैलिटी यानी क्रांतिकता हासिल कर ली। अगर भारत का परमाणु कार्यक्रम इसी क्रिटिकैलिटी की सफल राह पर आगे बढ़ा तो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनने में देर नहीं लगेगी। इसका असर यह होगा कि भारत जल्द ही पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा पैदा करने की जगह स्वच्छ अक्षय ऊर्जा पैदा करने के लिए तैयार हो जाएगा।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत का कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र क्या है? क्रिटिकैलिटी क्या होती है और इसे हासिल करने के बाद पलक्कम संयंत्र के चर्चा में आने की क्या वजहें हैं? भारत के लिए यह उपलब्धि कितनी बड़ी है? कैसे भारत 1950 के दशक में देखा गया परमाणु ऊर्जा का तीन चरण का सपना पूरा करने के करीब आ गया है? आइये जानते हैं…
