पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 39वें दिन में प्रवेश कर रहा है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रशांत क्षेत्र के अपने सहयोगी देशों पर जमकर गुस्सा निकाला। इसके साथ ही नाटो सहयोगियों के होर्मुज को फिर से खोलने में शामिल होने से इनकार करने पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि दक्षिण कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध प्रयासों में मदद नहीं की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जापान में 50,000 और दक्षिण कोरिया में 45,000 सैनिक तैनात किए हैं ताकि ये देश उत्तर कोरिया के खतरे से सुरक्षित रहें। इसके बावजूद, जब बात ईरान के खिलाफ कार्रवाई की आई, तो इन देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया।
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किसी ने नहीं की हमारी मदद- ट्रंप
अपने बयान में ट्रंप ने आगे कहा कि क्या आप जानते हैं कि ईरान के साथ युद्ध में साउथ कोरिया ने हमारी मदद नहीं की। ऑस्ट्रेलिया ने हमारी मदद नहीं की और ना ही जापान ने हमारी मदद नहीं की। इस दौरान ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका अपने सैनिक जापान और दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया जैसे खतरों से बचाने के लिए तैनात करता है, लेकिन ये देश अपनी तरफ से ईरान संघर्ष में अमेरिका का समर्थन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नाटो के कुछ सहयोगी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद नहीं की, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
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ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप ने क्या बड़े संकेत दिए?
इसके साथ ही इस दौरान उन्होंने ईरान युद्ध को लेकर भी कई बड़े संकेत दिए। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास इतनी सैन्य शक्ति है कि वह सिर्फ एक रात में पूरे ईरान को जड़ से मिटा सकता है। उन्होंने कहा वह रात कल भी हो सकती है। ट्रंप के इस बयान ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने अपने एक पायलट को बचाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया है। यह पायलट ईरान के अंदर यानी दुश्मन के इलाके में गिर गया था। वहां हालात बहुत ही ज्यादा खतरनाक थे। इस जांबाज पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका ने अपने 200 सैनिकों को मिशन पर लगाया था।